यात्रीगड़ अपने निजी सामान की स्वयं रक्षा करें, चोरी के लिए रेलवे जिम्मेदार नहीं होगा- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 15 जून को सुनाए एक फैसले में कहा है कि यात्रियों के निजी सामान की चोरी होने पर रेलवे विभाग जिम्मेदार नहीं होगा। इसके अलावा इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता फोरम के उस फैसले को भी रद्द कर दिया जिसमें अपीलकर्ता को उपभोक्ता फोरम ने मुआवजा देने का फ़ैसला सुनाया था।

दरअसल यह मामला 8 साल पुराना है। 8 साल पहले हुई चोरी की इस घटना में सुरेंद्र भोला नाम एक व्यक्ति रेलवे ट्रेन से यात्रा कर रहा था। यात्रा के दौरान वह अपनी कमर बेल्ट में 1 लाख साथ ले जा रहा था। यात्रा के दौरान ही सुरेंद्र भोला के इन 1 लाख रुपयों की चोरी हो गई थी।

चोरी होने के बाद पीड़ित सुरेंद्र बोला ने जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया। जिला उपभोक्ता फोरम ने अपीलकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाते हुए रेलवे को प्रतिपूर्ति के रूप में 1 लाख की भरपाई करने को कहा।

जिला उपभोक्ता फोरम के इस फैसले के विरोध में राज्य उपभोक्ता फोरम एवं राष्ट्रीय उपभोक्ता फोरम में भी अपील की गई। लेकीन राज्य एवं राष्ट्रीय दोनों उपभोक्ता फोरम ने इन अपीलों को ख़ारिज कर दिया। जिला उपभोक्ता फोरम के आदेश को बरकरार रखते हुए पीड़ित को 1 लाख की भरपाई का आदेश जारी रखा।

इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता फोरम के फैसले को पलटते हुए रेलवे विभाग के पक्ष में फैसला सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे विभाग के पक्ष में सुनाया फ़ैसला

जस्टिस विक्रम नाथ एवं जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की खंडपीठ ने उपभोक्ता फोरम के फैसले को पलटते हुए कहा कि “हमें यह समझ में नहीं आ रहा कि एक निजी चोरी को रेलवे की विफलता कैसे मान लें। यह रेलवे की जिम्मेदारी से बाहर है यदि यात्री अपने सामान की सुरक्षा स्वयं करने में सक्षम नहीं है तो रेलवे विभाग इसके लिए जिम्मेदार नहीं होगा “

आगे कोर्ट ने कहा कि किसी यात्री के निजी सामान की चोरी होना रेलवे की ‘सेवा में कमी’ नहीं माना जा सकता। इसके लिए रेलवे विभाग को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता यात्रियों को अपने निजी सामान की स्वयं रक्षा करनी चाहिए।

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